Monday, July 15, 2019

जंग

कितनी अजीब ये जंग होती है

ये जंग बरसों तक चलती है
कभी आंसू बन टपकती है
सूनी कलायिओं पे सजती है
किसी बाप के खोये हुए ख़्वाबों में भटकती है
किसी माँ की सूनी गोद भरती है
जंग स्टॉक मार्केट के इंडेक्स पे दिखती है
कभी राशन के बिल में चमकती है
बरसों बाद भी खाली मैदानों में फटती है
जंग अब जंग के मैदानों तक सीमित नहीं
ये हर गाँव हर शहर हर गली में गरजती है



जंग इंसान की समझदारी की तौहीन है
फिर भी
दुनिया के हर  कोने में ये तौहीन होती है

जंग कभी ख़त्म नहीं होती
हर जंग एक नयी जंग का बीज बोती है!

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