Thursday, June 6, 2013

Bewajah Sharaab

Bewajah jab sharaab hoti hai
Lajawaab hoti hai
Na gham ka na khushi ki koi dakhal hoti hai
Jab na koi justuju hoti hai
Na kuch khone ka dar
...
Jab sirf maye saath hoti hai
Woh shaam kuch aur hoti hai

Ilzaam jab na uspe koi hota hai
Jab nasha na koi bojh dhota hai
Jab na koi kuch yaad karne ko peeta hai
Na koi bhoolne waala kissa hota hai
Jab sharaab koi dawaa nahin sirf sharaab hoti hai
lajawaab hoti hai

Monday, August 20, 2012

कहाँ गए?

दो शब्द कह कर कहाँ गए?
इक झलक दिखा कर कहाँ गए?
मैं एक पुराने सितार सा कोने में पड़ा था
छेड़ कर मेरे तारों को कहाँ गए ?

एक उम्मीद जगा कर कहाँ गए ?
सपने दिखा कर कहाँ गए ?
में ठहरे हुए पानी सा लेटा हुआ था
एक पथ्थर गिरा कर कहाँ गए?

तेरे इश्क में!!

मिली मायूसी,कभी तन्हाई
कभी बेरुखी, कभी बेवफाई
हुआ सुरूर, हुए मगरूर
हुए बद्नाम,कभी मशहूर
कभी चले,कभी रुके
कभी डूबे,कभी उभरे
झूठे वादे, कई इरादे
कोई निशानी,कितनी परेशानी
कभी इंतज़ार, कभी तलाश
मिली मय, रही प्यास
कभी सिमटे, कभी बिखरे
ढूँढा खुदको, मिले टुकड़े
कभी सोचे, कभी समझे
कई जस्बात, कितने खर्चे
हुई इन्तेहा, सब लुटा
खाली दिल, मेरा रहा

तेरे इश्क में!!

Sunday, August 19, 2012

रूह की कब्

किसे कहूं हाल-इ-दिल, कौन समझेगा?
किसे दिखाऊँ ज़ख्म दिल के, मरहम कौन करेगा?
इस दास्ताँ को मेरी कौन पढ़ेगा?

हसीन यादो का
जो सज न सके उन ख़्वाबों का
जो किये न कभी उन वादों का
ज़माने से टकराने के इरादों का
क़त्ल कर आया हूँ
उस कहानी को अभी अभी
दफ़्न कर आया हूँ

दिल मेरा अब जैसे रेगिस्तान है
कई दफन जस्बातों का कब्रिस्तान है
पर मौत पूरी तरह आई कहाँ है
हर बात पे डाल दी मिट्टी मग़र क्म्भक्त
उम्मीद जवां है
उम्मीद की तुम कभी आओगी
मेरी रूह की कब्र पर एक फूल चढ़ा जाओगी!!

** ये पढ़कर वो बोले
की हममे तो दफनाया नहीं जलाया जाता है?
रूह दफ्न है तुम शरीर जला देना !!

तूने

तूने ही दुनिया बनायी
तूने ही इंसान
इंसानों ने दुनिया को बांटा
बनाया जंग का मैदान
नज़रबंद किया तुझको
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरिजाघर
बनाये तेरे कितने मकान
बाहर झाँक लड़ रहा है अब
लेकर तेरा नाम !

Tuesday, August 7, 2012

अपने दिल की न कर सकूं

अपने दिल की न कर सकूं
ऐसे क्यूँ है हालात?
क्यूँ जुबां तक नहीं आती
दिल कि कोई भी बात?
क्यूँ पत्थर हो गए हैं
पिघलते नहीं जज़्बात?
इक उम्र सी लगती है
पल में गुज़रती थी जो रात?

इन सवालों में घिरा हूँ
मिलता नहीं क्यूँ कोई जवाब?

क्यूँ?

कई बार खुदसे मैं ये सवाल करता हूँ
क्यूँ तुमसे मैं इतनी मोहब्बत करता हूँ
क्या है ऐसा तुम में जो मैं दीवाना हो गया हूँ
क्यूँ अपने आप से यूँ बेगाना हो गया हूँ 

क्यूँ ये तमन्ना है की आसमान से
तारे तोड़ तुम्हारी झोली मैं डाल दूं
क्यूँ ये आरज़ू की फूलों से तुम्हारी राहें सजा दूं 
कई बार खुदसे मैं ये सवाल करता हूँ
क्यूँ तुमसे मैं इतनी मोहब्बत करता हूँ

क्यूँ जब भी मौसम बाघों मैं फूल खिलाता है
मुझे तुम्हारा मुस्कुराना याद आता है
क्यूँ जब भी बसंती हवाएं आती हैं
साथ अपने तुम्हारी खुशबू लाती है 
क्यूँ जब भी चौदव का चाँद उपक निकलता 
मुझसे उसमे तुम्हारा चेहरा दीखता है
क्यूँ हर शाम तुम्हारे सपने दिखाती है
हर सुबह तुम्हारी आस जगाती है
कई बार खुदसे मैं ये सवाल करता हूँ
क्यूँ तुमसे मैं इतनी मोहब्बत करता हूँ ।

क्यूँ हर रंग तुम्हारे रंग मैं रंगा हुआ लगता है
क्या ये सच है की तुम्हारी इज़ाज़त से इन्द्रधनुष निकलता है?
क्यूँ आजकल वक़्त बेवक्त ये सावन बरसता है
देखो तुम्हारे स्पर्श को आसमान भी तरसता है
क्यूँ ये कोयल इतने मधुर गीत गाती है
शायद अपने संगीत  से तुम्हे लुभाना चाहती है
क्यूँ हर अमावास को वो चाँद छिप जाता है
शायद मेरे महबूब वो तुमसे शर्माता है
कई बार मेरी धड़कन मुझसे सवाल करती है
क्यूँ तुमको देख इतनी जोर से धड़कती है

क्या कहें जबसे तुमसे मोहब्बत हुई है
न जाने कहाँ से इतनी हिम्मत मिल गयी है
कल तक जो न था मंजिल का दूर तक नज़ारा
अब ढूँढने लगा हूँ मझधार में किनारा
क्यूँ मुझको तुमपे इतना ऐतबार है
तुम्हारे इकरार को ये दिल बेक़रार है
न जाने क्यूँ मुझे तुम से इतना प्यार है

इन मोहब्बत की गलियों में दीवानों सा भटकता हूँ
हर कदम हर मोड़ पे में तुम्हे ढूंढता हूँ
इन उल्फत की राहों मैं इस कदर खो गया हूँ
तुमसे वफ़ा की चाहत मैं खुदसे बेवफा हो गया हूँ
तो क्या अगर मुझपे हँसता ज़माना आज है
मुझे फिर भी अपनी दीवानगी पर नाज़ है
पर बार बार में खुदसे ये सवाल करता हूँ
क्यूँ तुमसे में इतनी मोहब्बत करता हूँ 






Saturday, August 4, 2012

तू जब भी मेरे साथ होगा

तू जब भी मेरे साथ होगा
ज़माने को ऐतराज़ होगा 
हम हँसे तो बनेंगे अफ़साने
बेवफाई का हमपे इलज़ाम होगा

जुदा कर अश्कों में डुबो दे हमको
यही अब ज़माने का काम होगा
कोई झांकेगा ना अपने गिरेबान में
तेरे मेरे गिरेंबान पे हाथ होगा

इनको कुछ ना कहेंगे हम दोनों
यही अपना इनसे इन्तेकाम होगा

खता

तुझसे मोहब्बत की खता हो गयी
सारी काएनात पे फ़तेह हो गयी
तुझसे वादा किया मैंने वफ़ा का
तेरी शिकायत की वजह हो गयी 

तेरी जुस्तजू में

तेरी जुस्तजू में मुझे क्या मिला
इश्क की इन्तहा मिली
ग़म का सिलसिला मिला

तेरी आरज़ू में मुझे क्या मिला
तड़पते हुए दिन मिले
रातों को जागना मिला 

तेरी बज़्म में मुझे क्या मिला
तेरे हुस्न की रौनक मिली
मेरे दिल का अन्धेरा मिला

तेरी हसरत में मुझको क्या मिला
हर सांस आखरी मिली
दिल थमा थमा मिला


मुझ बोल दो मेरे सनम

मुझ बोल दो मेरे सनम
दर से तेरे जाऊं कहाँ 
कोई रास्ता दीखता नहीं 
मंजिल का न कोई निशाँ 

चल लिया अंगारों पर 
दरिया का कोई दर नहीं 
तू मिले एक पल भी तो 
डूब जाने की फिकर नहीं 
मुझे बोल दो उस पार बस 
मिलोगी मुझको तुम वहीँ 

अब तलाश बस हर वक़्त है 
कोई रास्ता दीखता नहीं 

Tuesday, July 31, 2012

मेरी ज़िन्दगी गुज़ार दो

तेरे बिन जो ये पल कट रहें हैं
मेरी ज़िन्दगी के तुकडे बंट रहें हैं
समेट लो इन्हें मुझे पुकार लो
बाहों का अपनी मुझे हार दो
कुछ न कहो बस अपना दीदार दो
ऐसे ही मेरी ज़िन्दगी गुज़ार दो ।

Friday, July 27, 2012

क़यामत से पहले

इस जिस्म से जान निकलने से पहले
आखरी सांस के उखाड़ने से पहले
आखों की आखरी किरण निकलने से पहले
धडकते दिल के थमने से पहले
बन के क़यामत आ जाना क़यामत से पहले 

खफ़ा न होना

तुझे बाहों में ले लूं तो खफ़ा न होना
इन जुल्फों से खेलूँ तो ख़फा न होना
तेरे होठों को छु लूं तो ख़फा न होना
प्यार कर लूं तो ख़फा न होना
मैं कुछ पल जी लूं तो ख़फा न होना

मुझे भी तू ज़रा प्यार करे
ये जिद पकड़ लूं तो खफा न होना 

इरादा है

साथ देने का इरादा है
दूर तक चलने का इरादा है
मंजिल हमें मिले न सही
रास्ता तय करने का इरादा है

लडखडाने का इरादा है
संभल जाने का इरादा है
फूल बिछा पाऊँ राहों मैं न सही
खुद बिछ जाने का इरादा है

सब से लड़ जाने का इरादा है
तुझे छीन लाने का इरादा है
जीत जाना युझे बस में न सही
जुस्तजू मैं मिट जाने का इरादा है 

बात

मैं तुझसे क्या बात करूँ ?
अकसर कहते कहते सोच में पड़ जाता हूँ
किस तौर तुझे बतलाऊं
दिल का हाल समझाउं
कैसे बयान हालात करूं?

मैं तुझसे कैसे बात करूं
हंस के कह दूँ दिल का हाल
या आंसूओं की बरसात करूँ
या अंदाज़-ए -बेफिक्री से
बयान अपने जसबात करूं

मैं तुझसे क्या बात करूँ ?
मैं तुझसे कैसे बात करूँ ?

Thursday, July 26, 2012

ये रात वो रात नहीं

दिल में कोई जस्बात नहीं
ये रात है या रात नहीं?
अँधेरा तो है बाहर
पर सितारों की बारात नहीं
बादल है घने आसमां में
पर हो रही बरसात नहीं
नींद गहरी हैं आँखों में
मगर हो रही मुलाक़ात नहीं
तेरी याद है
तेरी काली आँखें हैं
तेरी जुल्फों के साये हैं
तेरी मुस्कान की रौशनी
तेरी खुशबू भी है नशा भी
पर तू साथ नहीं
शायद ये रात वो रात नहीं  ।

The last Cigarette

Last cigarette in the packet
I take it out
Bring it to my mouth
Think of lighting it
But then keep it back
Dont know how long
Shall i have to wait
Before you are here.
My only company this night
This last cigarette..

Finallly,I put it to light
Smoke spreads into the night
All hope takes flight
There lies the empty packet
And my empty heart..

Wednesday, July 25, 2012

आस

इक बार दिल से आवाज़ दे
मेरी ज़िन्दगी को नया अंदाज़ दे
मोहब्बत न सही मुझसे पर
मुझे तू मेरी होने का एहसास दे
किसी जनम मैं भी न बुझ पाए
मुझे तू एसी  प्यास दे
प्यार करूँ टूट कर तुझसे
तुझको पाऊँ कभी ये आस दे.

Tuesday, July 24, 2012

तू जब भी मेरे आस पास होती है

तू जब भी मेरे आस पास होती है
खुशियाँ बदहवास होती है

तेरे जाने पे महक रह जाती है
तनहाई भी फिर लाजवाब होती है

जिस तौर भी रक्खे मुझे मेरा खुदा
एक तू है तो हर कमी दूर होती है

तेरे चेहरे\का बस नूर ही काफ़ी है
कहाँ फिर रौशनी की कमी होती है

तुझसे ही नज्म् बनती है मेरी
तेरे बारे मैं ही हर घज़ल् होती है

इन बहारों का क्या करूँ मैं मेरे सनम
इनमे कहाँ तुझसी कशिश होती है

इक जनम मैं ही हज़ार बार जीलें
किसे अगले जनम की खबर होती है ।